गेंहू में बाली निकलने से पहले 200 रु का चमत्कारिक फार्मूला 1 फिट की बाली 80 क्विंटल पैदावार.
गेहूं में पीलापन दूर करने का उपाय:
अगर खाद डालने के बाद भी गेहूं पीला है, तो इसका कारण मिट्टी का पीएच लेवल अधिक होना या ठंड की वजह से पोषक तत्वों का अवशोषण न होना हो सकता है। इसके समाधान के लिए 1 किलो यूरिया, आधा किलो 33% जिंक, 1 किलो मैग्नीशियम सल्फेट, आधा किलो मैंगनीज सल्फेट और आधा किलो फेरस सल्फेट को 180 से 200 लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करें। इससे फसल में क्लोरोफिल बढ़ता है और पीलापन खत्म होता है।
फसल की लंबाई नियंत्रित करना:
ऐसी किस्में जिनकी ऊंचाई ज्यादा बढ़ती है (जैसे DBW 303 या 187), उनके गिरने का खतरा रहता है। फसल गिरने से पैदावार में 30 से 40% की कमी आ सकती है। इसे रोकने के लिए 50 से 55 दिन की अवस्था पर लियोसिन (PGR) का स्प्रे करना चाहिए। इसका अनुपात 2 मिली प्रति लीटर पानी रखना चाहिए। भारी मिट्टी वाले खेतों में इसके साथ 1 मिली प्रति लीटर के हिसाब से टेबुकोनाजोल भी मिलाया जा सकता है।
गबोट अवस्था (बालियां निकलने से पहले) का प्रबंधन:
जब फसल 65 से 75 दिन की हो और बालियां गाभा अवस्था में हों, तब जमीन में 10 से 15 किलो कैल्शियम नाइट्रेट के साथ थोड़ा यूरिया मिलाकर डालना चाहिए। इससे तना मजबूत होता है और नाइट्रोजन की कमी पूरी होती है।
NPK का छिड़काव:
बालियां निकलने से ठीक पहले NPK 0:52:34 का स्प्रे करना बहुत लाभदायक होता है। इसमें मौजूद फॉस्फोरस और पोटाश बालियों की लंबाई बढ़ाते हैं, दानों को चमकदार और मोटा बनाते हैं और फसल को मौसमी तनाव या अचानक बढ़ती गर्मी से बचाते हैं।
इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान अपनी फसल की गुणवत्ता और वजन दोनों बढ़ा सकते हैं।